लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को मिली नई रफ्तार, भूमिगत निर्माण के लिए एफकॉन्स का चयन
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मेट्रो विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर का चयन किया गया है। इस परियोजना के आगे बढ़ने से पुराने लखनऊ सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मेट्रो कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
11 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा कॉरिडोर
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की योजना में एलिवेटेड और भूमिगत, दोनों प्रकार के मेट्रो ट्रैक शामिल हैं। समाचार पत्र में दी गई तालिका के अनुसार, कॉरिडोर में लगभग 4.3 किलोमीटर का एलिवेटेड हिस्सा और 6.9 किलोमीटर का भूमिगत हिस्सा प्रस्तावित है। इस पूरे कॉरिडोर पर कुल 12 मेट्रो स्टेशन होंगे, जिनमें पांच एलिवेटेड और सात भूमिगत स्टेशन शामिल हैं।
प्रस्तावित मार्ग में चौक, मेडिकल चौराहा, सिटी रेलवे स्टेशन, पांडेयगंज, अमीनाबाद और गौतम बुद्ध मार्ग जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इससे पुराने शहर के व्यस्त इलाकों तक मेट्रो की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पांडेयगंज स्टेशन का निर्माण होगा चुनौतीपूर्ण
इस परियोजना में पांडेयगंज मेट्रो स्टेशन का निर्माण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। समाचार के मुताबिक, यह स्टेशन जमीन से लगभग 35 से 38 मीटर नीचे बनाया जाएगा। इतनी गहराई में स्टेशन तैयार करने के लिए तकनीकी दक्षता, सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
भूमिगत मेट्रो निर्माण के दौरान आसपास की इमारतों, सड़कों और मौजूदा बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखना भी जरूरी होगा। पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा करना परियोजना की बड़ी चुनौतियों में से एक रहेगा।
बेहतर कनेक्टिविटी और यातायात को मिलेगी राहत
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का उद्देश्य शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना है। परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों को सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने और अधिक सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिल सकता है। इससे व्यस्त इलाकों में यातायात का दबाव घटाने में भी मदद मिलने की संभावना है।
अब भूमिगत सेक्शन के निर्माण के लिए कंपनी का चयन होने के बाद परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। आने वाले समय में निर्माण कार्य की प्रगति, समयसीमा और सुरक्षा मानकों पर नजर रहेगी। लखनऊ मेट्रो का यह विस्तार शहर के परिवहन ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।